"कुछ कहना है"

04 December, 2021

छंद के छलछंद : एक कार्यशाला

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भाग 1 पाठ 1 मात्रा गणना: (जितना मैं समझा) बिना स्वरों के कोई व्यंजन, कभी नहीं होता उच्चारित। मात्राओं की गणना करना, आरोपित स्वर पर आधारित। ...
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रविकर
I S M Dhanbad, India
वर्णों का आंटा गूँथ-गूँथ, शब्दों की टिकिया गढ़ता हूँ| समय-अग्नि में दहकाकर, मद्धिम-मद्धिम तलता हूँ|| चढ़ा चासनी भावों की, ये शब्द डुबाता जाता हूँ | गरी-चिरोंजी अलंकार से, फिर क्रम वार सजाता हूँ ||
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