27 June, 2013

जहर बुझाए तीर, कलेजा ज्यों ज्यों हूके-

 चूके ना वाणी कभी, भेदे अपना लक्ष्य |
दुर्जन सज्जन चर अचर, चाहे भक्ष्याभक्ष्य |

चाहे भक्ष्याभक्ष्य, ढाल-वाणी बारूदी |
छोड़े जिभ्या बाण, ढाल क्यों नाहक कूदी |

जहर बुझाए तीर, कलेजा ज्यों ज्यों हूके |
जाएँ रिश्ते टूट, किन्तु ना जिभ्या चूके || ,



5 comments:

  1. जाएँ रिश्ते टूट, किन्तु ना जिभ्या चूके || ,
    Badee hee achook baat kah dee aapne....

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  2. बहुत सुन्‍दर रचना

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  3. बहुत सुन्‍दर रचना

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