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23 January, 2014

त्राहिमाम उच्चार, हुआ प्रभुमै मै मैगल

 

(१)
मै-मैगल अंकुश-रहित, *गलगाजन जलकेलि  |
पग जकड़े गलग्राह जब, होय बंद अठखेलि |
मैगल=हाथी    गलगाजन=आनंद से गरजना

होय बंद अठखेलि, ताल में ताल ठोंकते  |
लड़ें युद्ध गज-ग्राह, समूची शक्ति झोंकते |

शिथिल होंय पद-चार, शुण्ड ऊपर कर विह्वल |
त्राहिमाम उच्चार, हुआ प्रभुमै मै मैगल ॥

(२)
तुम तुमड़ी तुल तुक तुमुल, सुन नागिन-मन नाँच |
बिसराऊँ सुध-बुध जहर, शुद्ध तत्त्व हों पाँच |

शुद्ध तत्त्व हों पाँच, दूर हों नाग विषैले |
पड़े तुम्हारी आँच, कीर्ति दुनिया में फैले |

रविकर दर्शन साँच, भीड़ भारी है उमड़ी |
काँचुलि काँचन कांति, बढ़ाये तुर तुम तुमड़ी ||