श्मशान कर रहा ये मौसम हुआ पराया
जल की फुहार जलती, फूंकता कुआँ है
लोमड़ी सिखाती सब प्रेम से रहो संग
मल्हार गीत गाता देखो गधा मुआं है
इस राजनीति में अब तल्खियाँ रही बस
उजाड़ता चमन को खुद ही बागवां है
रहजन-व-राही-रहबर पहचान लो तो तोबा
देख 'रविकर' सबका चेहरा धुआं-धुआं है