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29 March, 2011

चेहरा धुआं-धुआं है

श्मशान कर रहा ये मौसम हुआ पराया 
जल की फुहार जलती, फूंकता कुआँ है
लोमड़ी सिखाती सब प्रेम से रहो संग 
मल्हार गीत गाता देखो गधा मुआं है

इस राजनीति में अब तल्खियाँ रही बस 
उजाड़ता चमन को खुद ही बागवां है
रहजन-व-राही-रहबर पहचान लो तो तोबा 
देख 'रविकर' सबका चेहरा धुआं-धुआं है 
  

25 March, 2011

मनमे अतीत की याद लिए फिरते है

निज अंतर में उन्माद लिए फिरते हैं

उन्मादों में अवसाद लिए फिरते हैं

अंदर ही अन्दर झुलस रही है चाहें

मनमे अतीत की याद लिए फिरते है




               बेकस का कोमल हृदय जला करता है

              निशदिन उनका कृष-गात धुला करता है

              दुखों की नाव बनाये नाविक -

              दुर्दिन सागर पर किया करता है





औसत से दुगुना भार लिए फिरते हैं

संग में कितनों का प्यार लिए फिरते हैं

यदि किसी भिखारी ने उनसे कुछ माँगा

भाषण का शिष्ट -आचार लिए फिरते हैं





            जो सुरा-सुंदरी पान किया करते हैं

           'कल्याण' 'सोमरस' नाम दिया करते हैं

           चाहे कितना भी चीखे-चिल्लाये जनता

           वे कुर्सी-कृष्ण का ध्यान किया करते हैं