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03 January, 2013

नारी तन-मन गोद, गोद में जिनके खेले -



 शादी कच्ची उम्र में, लाद रहे ड्रेस कोड ।
नए नए प्रतिबंध नित, नारी तन-मन गोद ।
नारी तन-मन गोद, गोद में जिनके खेले ।
कब्र रहे वे खोद, खड़े कर रहे झमेले ।
 सृष्टि खड़ी भयभीत, मजे लेते प्रतिवादी ।
जहाँ तहाँ ले घेर, बनाते जबरन शादी ।।

होय पुरुष का जन्म, हाथ पर चला आरियाँ -


इक नारी को घेर लें, दानव दुष्ट विचार ।
 शक्ति पुरुष की जो बढ़ी, अंड-बंड व्यवहार ।
अंड-बंड व्यवहार, करें संकल्प नारियां ।
होय पुरुष का जन्म, हाथ पर चला आरियाँ ।
काट रखे इक हाथ, बने नहिं अत्याचारी ।
कर पाए ना घात,  पड़े भारी इक नारी ।।

10 comments:

  1. बहुत बढ़िया विचार है ऐसा ही कुछ करना पड़ेगा.एक दृष्टांत ,नजीर बनानी पड़ेगी उससे पहले बहरों के आसन नहीं डोलेंगे .

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  2. विचारणीय योग बातें लाजवाब अंदाज वर्तमान परिस्थिति का यथार्थ वर्णन, हार्दिक बधाई सर

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  3. वर्तमान दशा का सटीक आकलन....
    विरोध होना ही चाहिए....

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (06-01-2013) के चर्चा मंच-1116 (जनवरी की ठण्ड) पर भी होगी!
    --
    कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि चर्चा में स्थान पाने वाले ब्लॉगर्स को मैं सूचना क्यों भेजता हूँ कि उनकी प्रविष्टि की चर्चा चर्चा मंच पर है। लेकिन तभी अन्तर्मन से आवाज आती है कि मैं जो कुछ कर रहा हूँ वह सही कर रहा हूँ। क्योंकि इसका एक कारण तो यह है कि इससे लिंक सत्यापित हो जाते हैं और दूसरा कारण यह है कि किसी पत्रिका या साइट पर यदि किसी का लिंक लिया जाता है उसको सूचित करना व्यवस्थापक का कर्तव्य होता है।
    सादर...!
    नववर्ष की मंगलकामनाओं के साथ-
    सूचनार्थ!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. बेहतरीन तंज ,रूपकात्मक अभिव्यक्ति विचार की हमारे दौर की सुलगती दावानल की .जलाना पड़ेगा पूरा आरण्य .

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  6. आपकी ताज़ा टिपण्णी के लिए आभार .

    आज का अखबार है तैयार रहना ,

    हर घडी मातम यहाँ तैयार रहना ,

    ये शहर है दोस्तों तैयार रहना .

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  7. दम है आपकी बात में ...
    समाज को दिशा ज्ञान देती रचना ...

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