
आश्विन की तिथि पञ्चमी, रहा नवासी वर्ष,
बहन शिवा की आ गई, हर्ष चरम उत्कर्ष |
हर्ष चरम उत्कर्ष, शीघ्र ही लगी डोलने,
ताला - चाभी फर्श, पेटिका लगी खोलने |
कह रविकर हरसाय, ख़ुशी से बीते हरदिन,
माता की नवरात, मास फलदायक आश्विन ||
भाई के संग में शुरू , किया पढाई कर्म |
सीखे थोड़ी देर से, पर भूले न मर्म |
पर भूले न मर्म, शिवा को टक्कर देती |
सीखी बाइक कार, कदम न पीछे लेती |
स्वस्ति-मेधा बहन, सिखा के खुब हरसाई |
प्यार हृदय में गहन, शिवा सा पाई भाई ||
राष्ट्रीय संस्थान में, भाई इलहाबाद,
जीवन में पहली दफा, था गहरा अवसाद |
था गहरा अवसाद, पीलिया को भी झेली ,
मैं एडमिट वेलूर, साल इक पढ़ी अकेली |
माँ का पा आशीष, किया श्रम इम्तिहान में,
एडमिट दुर्गापुर, राष्ट्रीय संस्थान में ||
भाई टी सी आय एल, बहन है टी सी यस |
लड़का-लड़की में भले, भेद हैं करते कस ?
भेद हैं करते कस, साथ खूब क्रिकेट खेली |
भाई की है दोस्त, बहन की बड़ी सहेली |
मात-पिता हम देत, खूब आशीष बधाई |
स्वस्ति-मेधा बहन, शिवा सा प्यारा भाई ||
लड़का-लड़की में भले, भेद हैं करते कस ?
भेद हैं करते कस, साथ खूब क्रिकेट खेली |
भाई की है दोस्त, बहन की बड़ी सहेली |
मात-पिता हम देत, खूब आशीष बधाई |
स्वस्ति-मेधा बहन, शिवा सा प्यारा भाई ||
