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03 February, 2016

नहीं कफ़न में जेब, करे क्या ? मोती पूछे

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(1)
पूछे मोती लाल से, भैया हीरा लाल |
रहा बदलता इस तरह, क्यूँ मालिक हर साल |
क्यूँ मालिक हर साल, बाल की खाल निकाले |
सुनकर सरल सवाल, दिखाकर बोला ताले |
यह मानव की जात, जगत में आया छूछे |
नहीं कफ़न में जेब, करे क्या ? मोती पूछे ||
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(2)
ठेला पर सब्जी रखे, बेंचे बालक नेक |
पालक है क्या? पूँछता, था भलमानुष एक |
था भलमानुष एक, अगर पालक ही होता |
मैं बेचारा बोझ, यहाँ आकर क्यूँ ढोता |
कह रविकर कविराय, कमाऊ पूत अकेला |

पालूं मैं परिवार, लगा सब्जी का ठेला || 
दोहा 
निर्भरता नैराश्य दे, उचित सदा सहयोग |

सदा आत्म-निर्भर रहो, करो स्वयं उद्योग ||

03 February, 2015

गलती की परवाह कर, नहिं तो बंटाधार-

गलती की परवाह कर, वरना बंटाधार |
स्वयं सुधारोगे अगर, होगा बेड़ापार |
होगा बेड़ापार, गलतिया हो ही जाती । 
करिये मत दो बार, नीति तो यही सिखाती । 
होती कभी न हार, हमेशा विपदा टलती  |
जो लेते यह सीख, दाल उनकी ही गलती ।।  



10 June, 2011

डरना सीखो--"दमन-राज" से नहीं

डरना  सीखो--भूत-पिशाच से नहीं,
बल्कि  नर-पिशाच से |
डरना सीखो--महाविनाश से नहीं,
बल्कि  नरक-आँच से ||

डरना सीखो--सिर-बिठाने से नहीं,  
बल्कि  नंगे-नाच  से |
डरना सीखो--राज-काज से नहीं, 
बल्कि अन्धी-जाँच से |

डरना सीखो--तर्क-शास्त्र  से नहीं, 
बल्कि तीन-पाँच से | 
डरना सीखो--"दमन-राज" से नहीं,
बल्कि  आत्म-साँच से ||

11 April, 2011

पोसिये दिल से बच्चा

गोद बिठाते ही दिया आँख में अंगुली डाल
जग में ऐसी लरिकई, करते खड़े सवाल
करते खड़े सवाल, संभल कर रहना भाई
यही आँख का नूर, आँख से नीर बहाई 
कह 'रविकर' कविराय, पोसिये दिल से बच्चा
करिए कम उम्मीद,   रखेंगे  ईश्वर  अच्छा