Follow by Email

20 June, 2011

ठनका

देखा हमने--
तारे - अम्बर, सूरज-चंदा,
बाढ़-अकाल, 
धूप - छाँव |
धरती-सागर, बारिश-बादल,
लहरें- नाविक , 
साहिल-नाव ||
पर--
क्या देखा है ठनका  
डर जन गन का--
उनके मनका ||
बारिश आई --
नदियाँ बौराई --
छत पर जमता पानी --
कड़के बिजली 
गरजे  बादल 
चल--
साफ करें पनारा--
कचड़ा सारा |
और --
बस
गिरा ठनका 
गया  मारा --
बेचारा -
कमाऊ  पूत  ||
देखकर ठनका की करतूत 
ठनका मेरा माथा--
यह उसपर 
हाँ उसपर
क्यूँ नहीं पड़ जाता ||
जो भ्रष्टाचार से 
भौतिक सुख-सुविधा 
और कालाधन  कमाता ||




2 comments:

  1. देखकर ठनका की करतूत
    ठनका मेरा माथा--
    यह उसपर
    हाँ उसपर
    क्यूँ नहीं पड़ जाता ||
    जो भ्रष्टाचार से
    भौतिक सुख-सुविधा
    और कालाधन कमाता |
    उन पर कुछ नहीं पड़ता.

    ReplyDelete
  2. हाँ , उन पर कुछ नहीं पड़ता |
    ईश्वर को भी बुरों से डर लगता |

    ReplyDelete