28 February, 2012

रविकर आशीर्वाद, नए जोड़े को देता ।

कुंडली
अच्छे अच्छे लाल से, सीखे सकल समाज ।
सामूहिक दुष्कर्म से, मरे मनुजता लाज ।

मरे मनुजता लाज, दोष क्या उसका भैया ?
चला बराती साज,  वरे दुल्हन को  सैंया ।

रविकर आशीर्वाद, नए जोड़े को देता ।
रहे सदा आबाद, बलैयाँ बम-बम लेता । 

दोहा
   मरे मीडिया मुहुर्मुह, तड़क-भड़क पर रोज ।
 पहल अनोखी को भला, कैसे लेवे खोज ??                                                                       
 

9 comments:

  1. दोहों और कुंडलियों की बरसात है आपका ब्लॉग दिनेश जी ...
    आनद आ गया ...

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  2. अच्छे सार्थक दोहे...
    शुक्रिया.

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  3. सहज, सरल शब्दों के प्रयोग से सुंदर भावाभिव्यक्ति। बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    "AAJ KA AGRA BLOG"

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  4. सुन्दर एवं सार्थक दोहे !
    आभार !

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  5. आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (३३) में शामिल की गई है /आप आइये और अपने विचारों से अवगत करिए /आपका स्नेह और आशीर्वाद इस मंच को हमेशा मिलता रहे यही कामना है /आभार /
    इसका लिंक है
    http://hbfint.blogspot.in/2012/03/33-happy-holi.html

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  6. मरे मीडिया मुहुर्मुह, तड़क-भड़क पर रोज ।
    पहल अनोखी को भला, कैसे लेवे खोज ??

    मीडिया को चाहिये सनसनी ।

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