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22 May, 2012

पर यह मोहन कौन-

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पुतली की ज्योति प्रखर, सोया यमुना तीर ।
सत्य-अहिंसा देश हित, अर्पित किया शरीर ।

अर्पित किया शरीर, यशोदा माँ  का मोहन ।
कुरुक्षेत्र का युद्ध, करे गीता  सा  प्रवचन ।



पर यह मोहन कौन, नचाये जिसको सुतली ।
कौन नचावन-हार,  बना नाचे कठपुतली ।। 

Kathputli, Indian String Puppetry


5 comments:

  1. पर यह मोहन कौन, नचाये जिसको सुतली ।
    कौन नचावन-हार, बना नाचे कठपुतली ।।
    विष कन्या के हाथ में है भाई इसकी डोर ,
    अगला समर करीब है नहीं मिलेगा ठौर .

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  2. दोनों मोहन अब कोई नहीं जानता !

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  3. nobody knows and is good if we forget

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