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21 June, 2011

फिर से दूल्हा सजते हो तुम |

फिर से दूल्हा सजते हो तुम |
सारी संध्या  बजते हो तुम |
कितने अच्छे लगते हो तुम |
जब मंडप से भगते  हो तुम ||
              (२)
दिन भर जमके खटते हो तुम |
टुकड़े-टुकड़े बंटते हो तुम |
फिर उल्लू सा जगते हो तुम |
कितने अच्छे लगते हो तुम ||

अंधेर है,अंधेर है

3 comments:

  1. कितने अच्छे लगते हो तुम |
    जब मंडप से भगते हो तुम ||

    hahahahahah

    mastt.!!!!!!!!!!

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  2. दिन भर जमके खटते हो तुम |
    टुकड़े-टुकड़े बंटते हो तुम |
    फिर उल्लू सा जगते हो तुम |
    कितने अच्छे लगते हो तुम ||
    ये व्यंग्य बहुत खूब.

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  3. पुरानी
    समस्या पूर्ति मंच की समस्या है ये--
    कितने अच्छे लगते हो तुम |

    आभार

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