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21 June, 2011

दोहे-- प्रगति लोक-हित

चाहे प्रगति, लोक-हित, प्रतियोगी कुछ और |
खाने - पीने - मौज   के,    गए   पुराने   दौर ||  

प्रतियोगी भी स्वस्थ हों, मन में  रखें न द्वेष |
गला काट प्रतियोगिता, टालें कुटिल कलेश ||

उत्पादों  की  श्रेष्ठता ,  हो   कोशिश  भरपूर |
टांग खींचने से परन्तु , खुद  को  रक्खे दूर ||

होता   धंधा   खेल  में  , धंधे   में   हो  खेल |
ये गन्दी प्रतियोगिता, प्रगति  रही  धकेल  ||

उसकी शर्ट सफ़ेद  खुब, अपनी पीली  देख |
निज रेखा बढ़ न  सकी,  काटें  लम्बी  रेख ||  
जरा इन्हें भी देख लीजिये  ---

व्यर्थ हमने सिर कटाए

बचा लो धरती, मेरे राम

अंधेर है,अंधेर है



13 comments:

  1. चाहे प्रगति, लोक-हित, प्रतियोगी कुछ और |
    खाने - पीने - मौज के, गए पुराने दौर ||
    सही

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  2. उत्पादों की श्रेष्ठता , हो कोशिश भरपूर |
    टांग खींचने से परन्तु , खुद को रक्खे दूर ||

    बहुत अच्छा लिखा है , बधाई !

    आपकी कुछ और पुरानी पोस्ट्स भी अभी पढ़ी है … ।

    निरंतर सृजनरत रहने की आपकी प्रवृत्ति को नमन !
    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

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  3. बहुत बेहतरीन!!!!

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  4. जब विद्वानों की अनुकूल टिप्पणियां मिलती हैं तो दिल बाग-बाग हो जाता है |
    प्रतिकूल टिप्पणियों एवं आलोचना के लिए भी मन तैयार रहता है ताकि स्वयम को बद-दिमागी और अंट-शंट से बचाए रखा जा सके |
    बहुत-बहुत आभार |

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  5. प्रतियोगी भी स्वस्थ हों, मन में रखें न द्वेष |
    गला काट प्रतियोगिता, टालें कुटिल कलेश ||
    उत्पादों की श्रेष्ठता , हो कोशिश भरपूर |
    टांग खींचने से परन्तु , खुद को रक्खे दूर ||

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! बढ़िया लिखा है आपने! बहुत अच्छा लगा! बधाई!

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  6. बहुत-बहुत आभार |

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  7. बेहतरीन दोहे ।

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  8. उसकी शर्ट सफ़ेद खुब, अपनी पीली देख |
    निज रेखा बढ़ न सकी, काटें लम्बी रेख ||

    बहुत सारगर्भित और सटीक दोहे..बहुत सुन्दर

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  9. बहुत-बहुत स्वागत महोदय आपका |
    बहुत-बहुत स्वागत महोदया आपका |

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  10. उसकी शर्ट सफ़ेद खुब, अपनी पीली देख |
    निज रेखा बढ़ न सकी, काटें लम्बी रेख ||

    Bahut hee sateek aur sachche dohe. Anand aa gaya.

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  11. बहुत-बहुत स्वागत महोदया आपका |

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