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12 July, 2011

नैतिक शिक्षा

ram ram bhai पर मेरी  टिप्पणी 

जिम्मेदारी   के   लिए,  हो   जाओ  तैयार,   

बच्चों के प्रति है अगर, थोडा सा भी प्यार |

थोडा सा भी प्यार,  बड़ा  विश्वास जगाओ--
सबसे पहले स्वयं,  कठिन संयम अपनाओ |
है  जो  बात  जरुरी,  उसकी  करो  तैयारी |
नैतिक शिक्षा हुई ,   आज  की जिम्मेदारी ||

स्नेहमयी  स्पर्श  की, अपनी  इक  पहिचान,  
बुरी-नियत संपर्क का, चलो  दिलाते  ध्यान |
चलो  दिलाते  ध्यान, बताना   बहुत  जरुरी,
दिखे  भेड़  की  खाल, बना  के  रक्खे  दूरी |
करो   परीक्षण  स्वयं, बताओ सीधा रस्ता,
घर  आये   चुपचाप,  उठा के अपना बस्ता ||

पहली  कक्षा  में  सिखा, सेहत  के  सब  राज,
और  आठवीं  में  बता ,  सब  अंगों  के  काज |
सब  अंगों  के  काज,  मगर   विश्वास  जरुरी,
धीरे - धीरे    शांत,  करो     उत्सुकता     पूरी |
खतरे - रोग - निदान,  बताना  एक - एक  कर,
पशु-पिशाच  की  भीड़ , हमेशा  देख-रेख  कर ||

चंचल मन पर क्या कभी, चला किसी का जोर
हलकी  सी   बहती   हवा,   आग   लगाए   घोर |
आग    लगाए     घोर,   बचाना    चिंगारी    से,
पढना  लिखना  खेल,  सिखाओ  हुशियारी  से |
कह  रविकर  समझाए,  अगर  पढने  में  कच्चा,
रखिये   ज्यादा  ध्यान,  बिगड़  जाये  न  बच्चा ||

बच्चों को भी हो पता,  होवेगा  कब  व्याह,
रोजगार से लग चुका,  तब भी भरता आह |
तब भी भरता आह,   हुवा वो  पैंतिस  साला--
बढ़  जाते  हैं  चांस,  करे  न  मुँह  को काला |
सही समय पर व्याह,  कराओ  उसका  भाई,
इधर-उधर  हर-रोज  करे  न  कहीं  सगाई  ||

9 comments:

  1. हा हा हा
    तब भी भरता आह, हुवा वो पैंतिस साला--
    बढ़ जाते हैं चांस, करे न मुँह को काला |
    सही समय पर व्याह, कराओ उसका भाई,
    इधर-उधर हर-रोज करे न कहीं सगाई ||

    हा हा हा अब क्या कहूं आगे बात सही है भाई

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  2. बीरुभाई की एक चर्चित पोस्ट पर ये टिप्पणी की थी |
    मुझे लगा --
    इसे तो खुली पोस्ट के रूप में
    डालना ही चाहिए --
    सो आपके सामने हैं ||
    बहुत-बहुत आभार ||

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  3. स्नेहमयी स्पर्श की, अपनी इक पहिचान,
    बुरी-नियत संपर्क का, चलो दिलाते ध्यान |
    चलो दिलाते ध्यान, बताना बहुत जरुरी,
    दिखे भेड़ की खाल, बना के रक्खे दूरी |
    करो परीक्षण स्वयं, बताओ सीधा रस्ता,
    घर आये चुपचाप, उठा के अपना बस्ता ||badhiya

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  4. सुन्दर सीख भरी रचना

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  5. बच्चों को भी हो पता, होवेगा कब व्याह,
    रोजगार से लग चुका, तब भी भरता आह |
    तब भी भरता आह, हुवा वो पैंतिस साला--
    बढ़ जाते हैं चांस, करे न मुँह को काला |
    सही समय पर व्याह, कराओ उसका भाई,
    इधर-उधर हर-रोज करे न कहीं सगाई ||
    बहुत सही कहा आभार.

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  6. सबसे पहले स्वयं, कठिन संयम अपनाओ.............
    करो परीक्षण स्वयं, बताओ सीधा रस्ता,............
    और आठवीं में बता , सब अंगों के काज.............
    हलकी सी बहती हवा, आग लगाए घोर .........
    सही समय पर व्याह, कराओ उसका भाई.........

    एक सदगृहस्थ के लिए तमाम जरूरी बातों पर प्रकाश डाला है आपने| बधाई इस प्रस्तुति के लिए|

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  7. सुन्दर सीख भरी रचना

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  8. Quite impressive creation !..Very meaningful indeed.

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  9. आपके एक एक सुझाव से पूर्ण सहमति है...

    बाकी रचना सौन्दर्य की तो क्या कहूँ....लाजवाब !!!!

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