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10 September, 2011

चलो-चलो रे ! ब्याही जाती, सरकारी-शहजादी

                            " भारतीय  रेल"                             
      खुद साजो-सामान की        

चोर-उचक्के  घूमते, पक्का मौका-ताक |
 नजर हटी चम्पत हुए, लगा के रखो लाक ||
 लगा  के  रखो  लाक, टूट  जायेंगे  पल में ,
 जहर-खुरानी चूक,  ढाल लेंगे  बोतल  में |
कह रविकर समझाय, बहुत धंधे में पक्के |
बने रनिंग-स्टाफ, सभी ये चोर - उचक्के ||
  हटी  सावधानी, घटी  घटना |
आगरा, जबलपुर या पटना  ||
 "दिल्ली"
आवभगत मेहमान की 
आतंकी  हमलों  की आदी, भारत  की  आबादी,
  आतिशबाजी अतिवादी की, दिल्ली करती शादी |
 विध्वंसक हथियारों को ले, पाक हुआ बाराती--
 चलो-चलो रे ! ब्याही जाती, सरकारी-शहजादी ||
                                                                           --सुबोध-कान्त  
"भारत"
खुद के जानो-माल की
   शासन को सौ काम हैं, मन में राखो गोय ,
जहाँ-तहाँ बम फोड़ता, कहाँ  बचायें तोय |
कहाँ  बचायें तोय, धमाके  होते  अक्सर,
करो हिफाजत आप, यही है सबसे बेहतर |
 चिदंबरम की चीख, बड़ा फोड़ू है अनशन,
 बना प्राथमिक काम, बझा इसमें ही शासन ||

19 comments:

  1. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 12-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  2. आतंकी हमलों की आदी, भारत की आबादी,
    शासन को सौ काम हैं, मन में राखो गोय ,
    जहाँ-तहाँ बम फोड़ता, कहाँ बचायें तोय |

    ये सब हम सबको समझना ही होगा ....

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  3. सुंदर कुंडलियाँ बधाई और शुभकामनायें

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  4. चिदंबरम की चीख, बड़ा फोड़ू है अनशन,
    बना प्राथमिक काम, बझा इसमें ही शासन ||

    सरकार को जिनसे खतरा है वहीं तो चौकसी करेंगे ... अच्छी प्रस्तुति

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  5. कड़वा सच

    करो हिफाजत आप, यही है सबसे बेहतर |

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  6. सटीक सार्थक लाजवाब....

    दोहों में यथार्थ उतार लिया आपने...

    वाह !!!!

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  7. आपकी रचनात्मक क्षमता और ऊर्जा का दिनों दिन मैं तो कायल होते जा रहा हूं।

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  9. रविकर जी आपकी कुंडली और चौपाइयां जोरदार हैं ।
    सही है सरकार को सौ काम है वह कहां तक हमारी हिफाजत करेगी ।

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  10. चोर-उचक्के घूमते, पक्का मौका-ताक |
    नजर हटी चम्पत हुए, लगा के रखो लाक ||
    लगा के रखो लाक, टूट जायेंगे पल में ,
    जहर-खुरानी चूक, ढाल लेंगे बोतल में |
    कह रविकर समझाय, बहुत धंधे में पक्के |
    बने रनिंग-स्टाफ, सभी ये चोर - उचक्के ||
    हटी सावधानी, घटी घटना |
    आगरा, जबलपुर या पटना ||यही अब गांधी बाबा की रेल ,राहुलिया वन्श्वेल ...
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2011/09/blog-post_13.हटमल
    अफवाह फैलाना नहीं है वकील का काम .

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  11. "दिल्ली"
    आवभगत मेहमान की
    आतंकी हमलों की आदी, भारत की आबादी,
    आतिशबाजी अतिवादी की, दिल्ली करती शादी |
    विध्वंसक हथियारों को ले, पाक हुआ बाराती--
    चलो-चलो रे ! ब्याही जाती, सरकारी-शहजादी ||
    --सुबोध-कान्त क्या बात है दोश्त निचोड़ निचोड़ कर और एक और http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2011/09/blog-post_13.हटमल
    अफवाह फैलाना नहीं है वकील का काम .

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  12. "भारत"
    खुद के जानो-माल की
    शासन को सौ काम हैं, मन में राखो गोय ,
    जहाँ-तहाँ बम फोड़ता, कहाँ बचायें तोय |
    कहाँ बचायें तोय, धमाके होते अक्सर,
    करो हिफाजत आप, यही है सबसे बेहतर |
    चिदंबरम की चीख, बड़ा फोड़ू है अनशन,
    बना प्राथमिक काम, बझा इसमें ही शासन ||खुद को पहचानों मेरी भारत जान ,कर दो अब चिदाम्बरों का काम तमाम ......
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2011/09/blog-post_13.हटमल
    अफवाह फैलाना नहीं है वकील का काम .

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  13. रेल और दिल्ली ... दोनों का ही बुरा हाल है आज तो ...

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  14. ... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।

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