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04 March, 2012

अधूरी कुंडली

एक समाचार रूस से

रुसी पुत्र अबोध से, रुसी माता एक ।
खलल नींद में जो पड़ा, पुत्र  को देती फेंक । 
पुत्र  को देती फेंक, रही चौदहवीं मंजिल ।
तनिक नहीं अफ़सोस, खूब सोई फिर बेदिल ।
इस अफसोसनाक घटना पर --
आगे की दो पंक्तियाँ आप पूरी करें --
मुझसे नहीं लिखी जाती  
आदरणीय डा. श्याम जी गुप्त ने यह पंक्तियाँ जोड़ी हैं अधूरी कुंडली में--
जबरदस्त ।
बहुत बहुत आभार --
है अभागा समाज वह,यह राक्षसी चरित्र ।
गलत जगह पैदा हुआ, है वह रूसी पुत्र ॥

जब मुँह पर फूल बसन्त --

बुरा न मानो होली है --
मूँग दले होरा भुने, उरद उरसिला कूट ।
पापड बेले अनवरत, खाय दूसरा लूट ।।
http://1.bp.blogspot.com/-hxd-brxQyGk/TX4HoeMrb9I/AAAAAAAAADU/6P2I0pAZhJ0/s1600/100_4500.JPG
मालपुआ गुझिया मिली, मजेदार मधु स्वादु ।
स्वादु-धन्वा मन विकल, गुझरौटी कर जादु ।।
मन के लड्डू मन रहे,  लाल-पेर हो जाय ।
रंग बदलती आशिकी, झूठ सफ़ेद बनाय ।।
भाँग खाय बौराय के,  खेलें सन्त-महन्त ।
नशा उतरते फूलता, मुँह पर मियाँ बसन्त ।।
Rangoli design with diya in centre
होरा = चना का झाड़
उरसिला = चौड़ी छाती 
गुझिया = एक प्रकार की मिठाई 
गुझरौटी= नाभि के पास का भाग 
स्वादु-धन्वा = कामदेव
जब मुँह पर खिला बसन्त = डर जाना

13 comments:

  1. आपके इस प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 05-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  2. होली के पावन अवसर पर सुन्दर प्रस्तुति ....

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  3. दुखद से सुखद तक का सफर...
    अच्छी प्रस्तुति रविकर जी...

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    1. सार्थक और सामयिक प्रस्तुति, बधाई.
      मेरे ब्लॉग " meri kavitayen" की नवीनतम प्रविष्टि पर आप सादर आमंत्रित हैं.

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  4. भाँग खाय बौराय के, खेलें सन्त-महन्त ।
    नशा उतरते ही खिला, मुँह पर मियाँ बसन्त
    ।।बेहतरीन प्रस्तुति .होली मुबारक .

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  5. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    होली की शुभकामनाएँ!

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  6. होली की शुभकामनाये

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  7. लगा अब होली आ ही गयी ...सुंदर प्रस्तुति .... होली की शुभकामनायें

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  8. भंग से शुरू कर आखिर में रंग जमा दिया आपने!

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  9. happy holi... 3 din pahle hi rangon se bheengo diya aapne...

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  10. मूँग दले होरा भुने, उरद उरसिला कूट ।
    पापड बेले अनवरत, खाय दूसरा लूट ।।
    जो आपसे न हो पूरी ,वो कुंडली रहे अधूरी ............
    होली मुबारक .

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  11. सुन्दर....अति सुन्दर......होली की बधाई....

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  12. होरी के हुरदंग को, होरा भूने हूर ।
    हूर-हूर पर चढ रहा,देखो नूर-शुरूर ॥
    देखो नूर-शुरूर, चहुं तरफ़ हैं हुरियारे,
    तक-तक कर रंगधार,बदन पर मारें प्यारे।
    श्याम,भीग कर हुईं,रंगीली सब ही गोरी,
    सब पर होरी चढी,मस्त हो खेलें होरी ।।

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