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13 March, 2012

इन्सान दिखता मूर्ख कालिदास जो--


hughug 

गले मिलते ही कटारी कोंच दी थी --
अड़ कवच से नोक टेढ़ी हो गई ।


मुस्करा कर सामने वाला कहे-
जानता था ईद-होली का समय है ।।  












जब कुल्हाड़ी ले बढ़ा वो पेड़ को --
डाल पर बैठा हुआ भालू दिखा ।




फुसफुसाया पेड़ बोला क्या करें-
इन्सान दीखे मूर्ख कालिदास जो।





6 comments:

  1. हर समय एक संक्रमण काल होता है। हमारा भी है।

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  2. वाह!!!!
    इंसानी फितरत का क्या करें????

    सादर.

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  3. अच्छे व्यंग्य ...

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  4. नया अंदाज़ भी बेहतरीन !

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  5. अलग अंदाज़ की प्रस्तुति है आज ...

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