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12 July, 2012

लोथड़े को खून से सींची महीनों-

 
 जातिवादी-हिंसा
खून-पानी एक करके धर दिया है ।
गाँव सारा लाश से ही भर दिया है ।

हर जगह अब चल रही खूनी हुकूमत -
खून के आंसू रुलाकर  हर लिया है ।

माता -पिता -गुरु
लोथड़े को खून से सींची महीनों -
प्राण पाकर पुत्र ने नौकर किया है ।

खूं-पसीना एक करके बाप पाले-
पड़ा लथ-पथ खून घर में कर दिया है ।

उंगली पकड़ के सीखता जिनसे हुनर-
उंगली दिखाके ही बाहर कर दिया है ।

 भाई-बहिन-मित्र 

दांत-काटी रोटियां कर ली हजम ।
बोटियाँ करने का अब आर्डर  दिया है ।

बहिन बीसों बार राखी बाँध ली -
बार के हर अंग राखी कर दिया है ।

सर पर बिठाकर आज तक भाई रखा 
पर  भतीजों को चढ़ा सर पर दिया है ।।

3 comments:

  1. अलग-अलग रंग...पर सबके सब सच्चे हैं !

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  2. सर पर बिठाकर आज तक भाई रखा
    पर भतीजों को चढ़ा सर पर दिया है ।।
    बहुत खूब सर ,हर कूची का रंग अलग है ,सौन्दर्य और अर्थ छटा अलग है .

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  3. सर पर बिठाकर आज तक भाई रखा
    पर भतीजों को चढ़ा सर पर दिया है ।।

    संबंधों की दुनिया का कटु सत्य।

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