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08 January, 2013

अटके रविकर प्राण, डाल पुनि नजरें प्यारी -


    lyndsy fonseca lovely face

प्रेम-पुजारी आपका, हाथ हमारा थाम ।
छोड़-छाड़ अब क्यूँ चली, और करे बदनाम ।

और करे बदनाम,  काम का 'पहला' बन्दा ।
क़तर-व्यौंत कतराय, क़तर मत पर आइन्दा 

 अटके रविकर प्राण, डाल पुनि नजरें प्यारी 
कर जारी विज्ञप्तिमरे जब प्रेम-पुजारी 


6 comments:

  1. मधुर भाव लिये भावुक करती रचना,बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति

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  2. कुंडली स्वरुप रचना ... बहुत खूब...

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  3. क्या पता भूल जाएं प्रेम पुजारी के मरने पे ... हा हा ... उनकी तो अदा ही ऐसी होती है ... बहुत खूब ...

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  4. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

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