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09 January, 2013

वेशी ले गुजरा-त-मकु, आ-मोदी तूफ़ान-


 वेशी ले गुजरा-त-मकु, आ-मोदी तूफ़ान ।
 ला-ओ-वेशी ठान के, मिनटों में कल्यान ।
मिनटों में कल्यान, कहे घेरे बीमारी ।
भोगे हिन्दुस्तान,  मरे जनता बेचारी ।
तेरी है सरकार, झूठ की कैसी पेशी ।
है गलबहियां डाल, कहूँ राहुल क्या वेशी ??
तमकु = चिढ़कर 
मकु=कदाचित 
वेशी = अधिक
  ओ-वेशी मत बकबका, मुहाजिरों को देख |
सर्वाइव कैसे करें, शिया मियां कुल शेख |
शिया मियां कुल शेख, पाक की हालत बदतर |
इत मुस्लिम खुशहाल, किसी से हैं क्या कमतर ?
विश्लेषण अनुसार, हिन्दु है बड़ा हितैषी  |
बाप चुके थे बाट, बाट मत अब ओ बेशी ||
 

Kulwant Happy 
ओ वेशी मत बकबका, सह ले सह अस्तित्व ।
जीवन की कर बात रे, क्यूँकर घेरे मृत्यु ।
क्यूँकर घेरे मृत्यु , बात कर सौ करोड़ की ।
 लानत सौ सौ बार, बंद कर बन्दर घुड़की ।
कन्वर्टेड इंसान, पूर्वज तेरे देशी ।
कर डी एन ए मैच, बकबका मत ओ वेशी ।।

2 comments:

  1. अति सुन्दर प्रस्तुति! सर, ओवेसी और राज ठाकरे जैसे नेता हमारी देश के लिए एक गन्दी बीमारी हैं, जिनको भारत के विकास से कोई मतलब नहीं, इसके प्रति कोई दूरदर्शिता नहीं। ऐसे नेताओं को राजनीती और सामाजिक जीवन से दूर कर देना अनिवार्य है।

    नरेन्द्र गुप्ता

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