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22 February, 2013

अगस्त्य महर्षि कुँभारन के पुरखा पहला हम मानत भैया-



सुंदरी सवैया 
  अगस्त्य महर्षि कुँभारन के पुरखा पहला हम मानत भैया । 
धरती पर चाक बना पहला शुभ यंतर लेवत आज बलैया । 
अब कुंभ दिया चुकड़ी बनते, गति चाक बनावत अग्नि पकैया । 
जस कर्म करे जस द्रव्य भरे, गति पावत ये तस नश्वर नैया ।।"

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-23


गीली ठंडी शुष्क मकु, मिटटी *मिट्ठी मीठ |
मिटटी के पुतले समझ, मिटटी ही शुभ पीठ |
मिटटी ही शुभ पीठ, ढीठ काया की गड़बड़ |
मृदा चिकित्सा मूल, करो ना किंचित हड़-बड़ |
त्वचा दोष ज्वर दर्द, देह पड़ जाए पीली |
मिटटी विविध प्रकार, लगा दे पट्टी गीली ||

कुण्डलियाँ  
 पहला पहला यंत्र है,  इस दुनिया का चाक । 
बना प्रवर्तक यंत्र का, कुम्भकार की धाक । 

कुम्भकार की धाक, पूर्वज मुनि अगस्त्य है । 
मिटटी पावक पाक, मृत्यु पर अटल सत्य हैं । 

देता कृति आकार, रचयिता सहला सहला । 
कुम्भकार भगवान्, प्रवर्तक सबसे पहला ॥

मिटटी रौंधे प्रेम से, करें पुंसवन कर्म । 
गढ़े घड़े के अंग कुल, अन्दर बाहर मर्म । 
अन्दर बाहर मर्म, धर्म कुल तत्व निभाएं । 
तप-तप चक चक चर्म, अग्नि अंतर दहकाए । 
बनता पात्र सुपात्र, मगर मत मारो गिट्टी । 
संस्कार दो शेष, बना दो पावन मिटटी ॥

सुन्दर दोहे रच रहे, हरते मन का शोक ।
चाक चकाचक चल रहा, रे मानव मत रोक ।
रे मानव मत रोक, रचे अलबेली कृतियाँ ।
सुगढ़ सलोनी कई, कई में सौ विकृतियाँ ।
घालमेल में दक्ष, वायु जल अनल जलाकर ।
भू छोड़े नहिं अक्ष, कर्म सारे ही सुन्दर ॥

चक्र-चलैया चाकचक, चैली-चाक-कुम्हार |
मातृ मातृका मातृवत, नभ जल गगन बयार |
नभ जल गगन बयार, सार संसार बसाये  । 
गढ़े शुभाशुभ जीव, महारथि क्लीब बनाए । 
सिर काटे शिशु पाल, सु-भद्रे सुत मरवैया । 
व्यर्थ बजावत गाल, नियामक चक्र-चलैया ॥ 
चाकचक=दृढ़   चैली=लकड़ी  क्लीब = नपुंसक 


 मिट्टी सोखे  नियत जल, रौंधे रोज कुम्हार |
चढ़ा चाक पर नित्य ही, दे सुडौल आकार |
दे सुडौल आकार, धूप में उसे सुखा दे |
पावक गगन समीर, बड़ा मजबूत बना दे  |
सह सकती कृति ठेस, किन्तु गुम सिट्टी-पिट्टी  ||
टुकड़े टुकड़े अंश, पञ्च तत्व मिट्टी मिट्टी ||

 नई व्यवस्था दृढ़ दिखी, होय कलेजा चाक |
करे चाक-चौबंद जब, कैसे लेता ताक |
कैसे लेता ताक, ताक में लेकिन हरदम |
लख सालों की धाक, देह का घटता दमखम |
सब कुम्हार का दोष, शिथिल से अस्थि-आस्था |
मिटटी के प्रतिकूल, चाक की नई व्यवस्था ||
भगदड़ दुनिया में दिखे, समय चाक चल तेज |
कुम्भकार की हड़बड़ी, कृति अनगढ़ दे भेज |
कृति अनगढ़ दे भेज, बराबर नहीं अंगुलियाँ |
दिल दिमाग में भेद, मसलते नाजुक कलियाँ |
ठीक करा ले चाक, हटा मिटटी की गड़बड़ |
जल नभ पावक वायु, मचा ना पावें भगदड़ ||

4 comments:

  1. बेहतरीन ,बहु आयामी प्रस्तुति,

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  2. मुख्तलिफ अंदाज़ हैं आपके खूबसूरत सेतु हैं आजके चर्चाकार ,हम शुक्रगुजार हैं आपके .आपने हमें भी शरीक किया .कृपया यहाँ भी पधारें -

    गृह मंत्रीजी कहिन

    भारत के गृहमंत्रालय को आइन्दा सूचनाप्रदाता मंत्रालय कहा जाना चाहिए .सूचना देना एक बड़ी बात होती है .लोगों को आगाह करना -भाइयों खबरदार रहना फलां राज्य में आतंकी विस्फोट कर सकते हैं .कोई मामूली बात नहीं है .गृह युद्ध की आशंका हो तब भी सूचना प्रदाता मंत्रालय यही कहेगा भाइयों सावधान रहना गृह युद्ध छिड़ सकता है .लोग अपनी अपनी हिफाज़त करें .और वह चुप्पा सिंह हमेशा की तरह यही कहते पाकड़े जायेंगे -आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा .

    भाईसाहब हमारा मानना यह है कि वोट के आगे लार टपकाने वाली राजनीति आतंकवाद का मुकाबला कर ही नहीं सकती .बेहतर हो लोग खुद अपनी हिफाज़त करें .

    वोट के आगे लारटप काऊ राजनीति को एक बड़ा लक्ष्य हासिल करना है .बहुसंख्यकों की आबादी को अल्पसंख्यकों के बराबर लाना है .तभी तो भारत के संशाधनों पर मुसलामनों का पहला हक़ होगा .फिलवक्त यह अनुपात लड़का -लड़की अनुपात की तरह विषम बना हुआ है .यह ना -इंसाफी है .भारत की कोई सवा करोड़ आबादी में से कुछेक लाख ठिकाने लगते रहें तब भी इसे हासिल करने में वक्त लग जाएगा .बेहतर हो विस्फोट स्थल पर लोग बड़ी संख्या में पहुंचें ,सामूहिक विवाह की तरह सामूहिक हाराकरी का सुनहरा अवसर मुहैया करवाती है सरकार .भगवान उसका भला करे .इसमें सूचना प्रदाता मंत्रालय का बड़ा योगदान आने वाली नस्लें याद करेंगी .

    Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947
    गृह मंत्रीजी कहिन http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2013/02/blog-post_22.html …
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    2 hrsVirendra Sharma ‏@Veerubhai1947
    ram ram bhai मुखपृष्ठ शुक्रवार, 22 फरवरी 2013 गृह मंत्रीजी कहिनhttp://veerubhai1947.blogspot.in/
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  3. क्या बात कही है !मिट्टी बनाती सब है,मिटती नहीं और कितना-कितना साथ निभाती है -सारी औषधियों की मूल बन कर .

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