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11 March, 2013

नारा की नाराजगी, जगी आज की भोर-

 (1)
 नारा की नाराजगी, जगी आज की भोर । 
यह नारा कमजोर था, नारा नारीखोर । 
नारा नारीखोर, लगा सड़कों पर नारा । 
नर नारी इक साथ, देश सारा हुंकारा। 
कर के पश्चाताप, मुख्य आरोपी मारा । 
  नेता नारेबाज, पाप से करो किनारा ॥ 

  (2)

साफ़ सूपड़ा कर रहा, रोज मीडिया बोल । 
अर्थ हारकर खोजता, शब्दकोश को खोल । 
शब्दकोश को खोल, जरा मतलब समझाओ । 
हुई कहाँ उत्पत्ति, जरा इतिहास बताओ । 
आकर्षक यह शब्द, कमाए शब्द रोकडा । 
भाव समझ कापुरुष, अन्यथा साफ़ सूपड़ा ॥

5 comments:

  1. बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    अर्ज सुनिये

    आप मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

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  2. दिनांक 13/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी.बेह्तरीन अभिव्यक्ति !शुभकामनायें.

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  4. वाह ... यहाँ भी हैं ... बहुत खूब ...

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  5. वाह, बहुत खूब
    बेहतरीन सार्थक प्रस्तुति
    सादर !

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