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10 March, 2013

हुई लाल -पीली सखी, पी ली मीठी भांग-

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 29

दोहे 

रंग रँगीला दे जमा, रँगरसया रंगरूट |
रंग-महल रँगरेलियाँ, *फगुहारा ले लूट ||
*फगुआ गाने वाला पुरुष -

फ़गुआना फब फब्तियां, फन फ़नकार फनिंद |
रंग भंग भी ढंग से, नाचे गाये हिन्द ||

हुई लाल -पीली सखी, पी ली मीठी भांग |
  अँगिया रँगिया रँग गया, रंगत में अंगांग ||
हुई लाल-पीली प्रिया, दिखा रही है भाव |
अंग-अंग नीला किया, हरा हरा हर घाव ||
देख पनीले दृश्य को, छुपे शिशिर हेमंत ।
आँख गुलाबी दिख रही, पी ले तनि श्रीमंत ॥

तड़पत तनु तनि तरबतर, तरुनाई तति तर्क ।
लाल नैन बिन सैन के, अंग नोचते *कर्क ॥
*केकड़ा

अंग अनेकन अर्थ भरे लुकवावत हैं रँगवावत हैं-




"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 29


मदिरा सवैया 
नंग-धड़ंग अनंग-रती, *अकलांत अनंद मनावत हैं ।
रंग बसंत अनंत चढ़ा, शर-चाप चढ़ाय चलावत हैं ।
लाल हरा दिखलाय धरा, नभ नील सफ़ेद दिखावत हैं ।
अंग अनेकन अर्थ भरे, लुकवावत अंग रँगावत हैं ॥
*ग्लानि-रहित

7 comments:

  1. देख पनीले दृश्य को, छुपे शिशिर हेमंत ।
    आँख गुलाबी दिख रही, पी ले तनि श्रीमंत ॥
    बहुत बढ़िया !

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  2. खुमारी के रंग ऐसे ही होते हैं भैया साहब

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  3. वाह जबरदस्त रंग हैं, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  4. वाह, क्या कहने
    बहुत सुंदर

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  5. वाह वाह वाह गुरूजी.... तुस्सी ता छा गए....बल्ले ओ बल्ले |

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