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10 March, 2013

अंग अनेकन अर्थ भरे लुकवावत हैं रँगवावत हैं-

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 29

मदिरा सवैया 
नंग-धडंग अनंग-रती *अकलांत अनंद मनावत हैं ।

रंग बसंत अनंत चढ़ा शर चाप चढ़ाय चलावत हैं ।  

लाल हरा हुइ जाय धरा नभ नील सफ़ेद दिखावत हैं ।

अंग अनेकन अर्थ भरे लुकवावत हैं रँगवावत  हैं ॥
*ग्लानि-रहित

4 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति... बधाई

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  2. वाह बहुत ही प्रवाही और प्रभावी सवैया ।

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