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26 July, 2013

टंच माल है सौ टका, चाट चंट चंडाल-

टंच माल है सौ टका, चाट चंट चंडाल |
थूक थूक के चाटता, खूब बजावे गाल |


खूब बजावे गाल, बने जौहरी पुराना |
कभी गुरू-घंटाल, कभी आतंकी नाना |


वाणी से दिग्विजय, भूल है मकड़-जाल है |
ले अंतर में झाँक, बड़ा ही टंच माल है ||


दर्जी दिग्गी चीर के, सिले सिलसिलेवार |
कह फर्जी मुठभेड़ को, पोटे किसे लबार |

पोटे किसे लबार, शुद्ध दिखती खुदगर्जी |
जाय भाड़ में देश, करे अपनी मनमर्जी |

ले आतंकी पक्ष, अगर लादेन का कर्जी |
पर भड़का उन्माद, चीथड़े क्यूँकर दर्जी ||

9 comments:

  1. इससे बडा लबाडी आज तक नही देखा, दुष्ट को महिलाओं में माल दिखाई देता है, नालायक कहीं का.

    रामराम.

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  2. टंच माल है सौ टका, चाट चंट चंडाल |
    थूक थूक के चाटता, खूब बजावे गाल |

    Tau se sahmat !

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  3. दिग्‍विजय शब्‍द को खोखला कर दिया इस आदमी ने.....

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  4. भोथरा हो चूका है इसको कुछ भी कहे तो कोई फर्क नहीं पड़नें वाला !!

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  5. कांग्रेस का श्वान है जब तब भोंके खूब ।

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  6. ले आतंकी पक्ष, अगर लादेन का कर्जी |
    पर भड़का उन्माद, चीथड़े क्यूँकर दर्जी ||
    ये ही डुबोयेगा कांग्रेस के जर्जर जहाज़ को इसका रहना इस वक्त की मांग है .

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  7. इनके लिए तो उपमा भी कम है..

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  8. थूक थूक के चाटता, खूब बजावे गाल.

    पोटे किसे लबार, शुद्ध दिखती खुदगर्जी |
    जाय भाड़ में देश, करे अपनी मनमर्जी |

    क्रोध लाजिमी है । हिंदुस्तान और अधिकतर हिन्दुस्तानियों का कहना चाहिए हिन्दुओं का यही चरित्र रहा है . वरना मुठ्ठी भर सैनिक लेकर बख्तियार खिलजी दिल्ली से नालंदा नहीं पहुच गया होता . इसी चरित्र की वजह से १२०० वर्षों की गुलामी रही और इसके पुनरावृति की सम्भावना भी शीघ्र है और तब इनके वंशजों एवं अन्य में कोई फर्क नहीं होगा . दुर्दशा सबकी बराबर होगी .
    आपकी इस रचना के लिंक की प्रविष्टी सोमवार (29.07.2013) को ब्लॉग प्रसारण पर की जाएगी. कृपया पधारें .

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