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01 August, 2013

ताऊ तो बदनाम, चले तलिबानी छूरी -

इब बोलो की बोलता,  प्रतिबंधित हो स्कर्ट 
लन्दन मिडिल-स्कूल में, बढ़ता जाये फ्लर्ट

बढ़ता जाये फ्लर्ट,  हुआ ड्रेस कोड जरुरी 
ताऊ तो बदनाम, चले तलिबानी छूरी 

छोटी छोटी क्लास, बदन ज्यादा ना खोलो
होता आर्डर पास, तरक्की पर इब बोलो

10 comments:

  1. आपकी यह सुन्दर रचना दिनांक 02.08.2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

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  2. बोल चुका रविकर अब कोई क्या बोले
    :)

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  3. यह सोचने का विषय है कि वस्त्र शरीर को ढाँकने के लिये पहने जाते हैं या उत्तेजक रूप में प्रदर्शित करने के लिये के लिए .वस्त्र, सुरुचिपूर्ण और शालीनतापूर्वक शरीर को ढँके ,यह तो उचित ही है.
    अधिकतर अब सिनेमा और सीरियल्स में देख कर ड्रेसेज समाज में चलने लगती हैं .सिनेमा में नारी शरीर के प्रदर्शन कर जनता को आकृष्ट करने के लिए बदन-दिखाऊ कपड़े पहनाए जाते हैं अपना बाज़ार बढ़ाने के लिए. उनके सारे हथकंडे हैं एक ही उद्देश्य है ,व्यापार बढ़ाना पैसा कमाना .ये सब व्यापार बढ़ाने के लिए .और फिर वही ढंग चल निलकलता है .वही कपड़े फैशन बन जाते हैं .गरिमापूर्ण व्यक्तित्व की जगह बिकाऊ बाज़ारू माल की तरह. अपने को उद्घाटित करती हैं

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  4. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  5. तालीबानी ना हो पर शालीनता हो ।

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