Follow by Email

01 August, 2013

मारे छुरी-कटार, मिटा देता जो यौवन-

जाने मन समझे अकल, प्यार खुदा की देन |
रखूँ कलेजे से लगा, क्यों मिस करना ट्रेन |

क्यों मिस करना ट्रेन, दर्द तो सह-उत्पादन |
करूँ सहज स्वीकार, सजा लूँ अन्तर आँगन |

मारे छुरी-कटार, मिटा देता जो यौवन |
उसको सनकी धूर्त, मानता हूँ जानेमन ||

7 comments:

  1. आहा हा...बहुत सटीक.

    रामराम.

    ReplyDelete
  2. जाने मन समझे अकल, प्यार खुदा की देन |
    रखूँ कलेजे से लगा, क्यों मिस करना ट्रेन |

    सटीक...

    ReplyDelete