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18 December, 2013

रविकर पेट मरोड़, तोड़ते अनशन अन्ना-

(20 से 30 दिसम्बर प्रवास पर-फ़ैजाबाद में )
अन्ना बोले, खुश हुआ, भन्ना जाते आप |
चौकन्ना हो भ्रष्ट-कुल, बके अनाप-शनाप |

बके अनाप-शनाप, मुलायम मन को खटके |
लटके खटके झेल, कई दशकों से लटके |

हाथी देता छोड़, चूसना मीठा गन्ना |
रविकर पेट मरोड़, तोड़ते अनशन अन्ना ||

3 comments:

  1. वाह जी वाह मस्त ... अन्ना का गन्ना ...

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