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09 January, 2014

दूजे तल्ले के पिलर, आप करे आहूत-

पहले तल्ले के लिए, नहीं नींव मजबूत । 
दूजे तल्ले के पिलर, आप करे आहूत । 

आप करे आहूत, हड़बड़ी पूर्ण कार्य है । 
घूरें घर यमदूत, घूरता अघ-अनार्य है । 

माना दिल्ली दाँव, पड़े नहले पे दहले । 
बिन अनुभव ईमान, ढहाए भवन रुपहले ॥ 

4 comments:

  1. देखिए क्‍या होता है।

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  2. शुभ दिवस ! क्या ही सुन्दर कुण्डलियाँ !!

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  3. सार्थक सुन्दर कुण्डलियाँ
    सादर !

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