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21 December, 2014

दिखे उग्र इस्लाम, ईसाई देते गोली-

गोली बंदूकें उगा, नहीं जरूरी अन्न । 
खड़ा मुहाने पर जगत, विश्व-युद्ध आसन्न। 

विश्व-युद्ध आसन्न, तेल के कुँए लूट ले। 
कर भीषण विस्फोट, मार के तुरत फूट ले ।

हिन्दु देखता मौन, करे कम्युनिष्ट ठिठोली । 
दिखे उग्र इस्लाम, ईसाई देते गोली ॥ 


5 comments:

  1. बिलकुल सही कहा। अपने ही अपनी जड़ों में मट्ठा डाल रहे हैं।

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  2. सुंदर और सटीक बात

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  3. खतरनाक रास्ते पर बढ़ रहा है इंसान ...

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  4. सार्थक और सटीक बात
    बेहद उम्दा --
    सादर --
    दुनियां की सभी माओं के आंसू ----

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  5. सार्थक और सटीक बात

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