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17 February, 2016

धरे हाथ पर हाथ, करे क्या देख गिलानी

राष्ट्रवाद का पक्ष लो, या विपक्ष के साथ।
रह सकते निरपेक्ष भी, धरे हाथ पर हाथ।

धरे हाथ पर हाथ, करे क्या देख गिलानी ।
राष्ट्र-विरोधी नाद, सुनो हाफिज की बानी ।

रहा कन्हैया साथ, तथ्य यह बिन विवाद का |
वह भी जिम्मेदार, विरोधी राष्ट्रवाद का ||


(2)
निंदा कर रविकर कड़ी, गलत कुटाई नीति |
गाली-गुप्ता भी गलत, किन्तु विदेशी प्रीति |

किन्तु विदेशी प्रीति, देश को घुड़की देते |
देशद्रोहिता साफ़, नाम मोदी का लेते |

पूरा गया विपक्ष, जहाँ पर अफजल जिन्दा |
आयोजक की किन्तु, नहीं करते वे निंदा ||

4 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (19.02.2016) को "सफर रुक सकता नहीं " (चर्चा अंक-2257)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. पूरा गया विपक्ष, जहाँ पर अफजल जिन्दा |
    आयोजक की किन्तु, नहीं करते वे निंदा ||

    सार यहाँ है ।

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  3. बहुत सुन्दर और सटीक

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  4. बहुत सुन्दर और सटीक

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