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21 July, 2016

दोहे-

तन्त्र-मन्त्र-संयन्त्र को, दे षडयंत्र हराय।
शकुनि-कंस की काट है, केवल कृष्ण उपाय।।


बारिस होती देख जब, पंछी रहे लुकाय।
बादल के ऊपर उड़े, बाज बाज ना आय।।
भारी बारिस में जहाँ, पंछी रहे लुकाय।
बाज बाज आये नहीं, बादल पे चढ़ जाय ।।
विकट-परिस्थिति तोड़ दे, अगर आत्म-विश्वास।
देखो व्यक्ति-विशेष को, तोड़ चुका जो फाँस।।

राजनीति जब वोट की, करें सिद्ध वे स्वार्थ |
राष्ट्र-नीति बीमार है, मोहग्रस्त है पार्थ ||

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (23-07-2016) को "आतंक के कैंसर में जकड़ी दुनिया" (चर्चा अंक-2412) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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