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26 February, 2017

जिन्दगी


कुंडलियां 
रविकर इच्छा स्वप्न का, यूँ मत करना खून।
बल्कि काट नाखून सम, सच्चा मिले सुकून।
सच्चा मिले सुकून, जिन्दगी बढ़ती आगे ।
पढ़ आवश्यक पाठ, छोड़ दे स्वार्थ अभागे ।
कर परहित निष्काम, हमेशा आगे बढ़कर।
भली करेंगे राम, जिंदगी महके रविकर।।


दोहे 
रस्सी जैसी जिन्दगी, तने तने हालात्।
एक सिरे पर ख्वाहिसें, दूजे पे औकात।।

अस्त-व्यस्त यह जिन्दगी, रविकर रहा सँभाल।
डाल डाल खुशियाँ टंगी, पात पात जंजाल।।


चलो उड़ायें जिन्दगी, माँझा चकरी संग।
कटे नहीं काटो नहीं, रविकर कभी पतंग।।

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