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01 July, 2017

जानहुँ जन-जीवन जुआँ, जीत-हार का फेर


चुभे कील बन शख्स जो, रविकर उसे उखाड़।
मार हथौड़ा ठोक दे, अपना मौका ताड़।।



जानहुँ जन-जीवन जुआँ, जीत-हार का फेर।
पक्के पासे पास तो, भिड़ जा आँख तरेर।।



कुम्भकरण सम सिंह तो, विज्ञ गली के श्वान।
सर्प वंश है भीरु तो, जीवन है आसान।।



अधिक आत्मविश्वास में, इस धरती के मूढ़ |
विज्ञ दिखे शंकाग्रसित, यही समस्या गूढ़ ||

4 comments:

  1. बहुत ही लाजवाब.
    #हिंदी_ब्लागिँग में नया जोश भरने के लिये आपका सादर आभार
    रामराम
    ०४५

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  2. अन्तर्राष्ट्रीय ब्लोगर्स डे की शुभकामनायें ..... हिन्दी ब्लॉग दिवस का हैशटैग है #हिन्दी_ब्लॉगिंग .... पोस्ट लिखें या टिपण्णी , टैग अवश्य करें ......

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  3. बहुत ही शानदार .........यात्रा कहीं से शुरू हो वापसी घर पर ही होती है :)#हिंदी_ब्लोगिंग

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  4. वाह
    क्या बात है
    शुभकामनाएं

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