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27 August, 2017

कई सरकार खूंटी पर, रखी थी टांग डेरे में-

कई सरकार खूंटी पर, रखी थी टांग डेरे में।
अधिकतर भक्त दुर्जन के रहे अबतक अंधेरे में।
जयतु जय जांच अधिकारी, अदालत की सदा जय जय
चमत्कारी बलात्कारी पड़ा है आज फेरे में।

(२)
शहर में आग भड़काई जहर से जीभ बुझवाई।
कहर ढाया गरीबों पर, सड़क पर भीड़ उफनाई।
दहर डेरा अंधेरा कर, उजाले का सपन बेचे।
चतुर-चालाक ने कितने भगत की जान है खाई।।

6 comments:

  1. सही में इन्होंने क्या-क्या कर डाला

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (29-08-2017) को कई सरकार खूंटी पर, रखी थी टांग डेरे में-: चर्चामंच 2711 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत ही सुन्दर....सच को सच्चाई से उकेरती आपकी प्रस्तुति....लाजवाब....🙏🙏🙏

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  4. वाह! बहुत सुन्दर आभार ''एकलव्य"

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