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25 May, 2011

व्यर्थ ताने मारना तो बन्द करिए --

वो पडोसी आज तक पोछा लगाता, 
stock photo : Man milking a buffalo by hand into a bucket at the Sonepur livestock fair, Bihar, India
दूध  ग्वाले से दुहा कर रोज लाता 
हर सुबह सब्जी ख़रीदे खुद पकाता,
धुल के सारे वस्त्र नियमित फिर नहाता
DSC07648
गल्तियों पर कसम खाता गिड़गिडाता--
किन्तु बीबी जब डपटती डूब मरिये 
हौज में पानी भला किस हेतु भरिये ?


आठ घंटे चाकरी में जा बिताया, 
चार घंटे रोज बच्चों को पढाया---
http://www.simply-kids-play.com/image-files/kids-play-01.jpg
खेल नियमित शाम को संगमें खिलाया,
बागवानी का नया जो शौक आया
http://www.popupcanopies.org/wp-content/uploads/2010/11/gardening.jpg
एक घंटे पौध में, पानी पटाया, 
तुम पटी फिर भी नहीं, तो - की करिए ?
कैंचियों का है ज़माना खुब कतरिये |

http://www.haddonfield.k12.nj.us/hmhs/academics/english/parvat1.jpg
प्रभुने किये उपकार हमपर यूँ  बड़े,
हैं आज बच्चे पैर पर अपने खड़े --

लक्ष्य भेदा, बन चुके वे लाडले, 
मौजूदगी मेरी इधर,  घर में खले

पककर कढ़ाई से गिरे, चूल्हे पड़े, 
भून करके कह रही कि जल मरिए |
ढल चुकी है शाम, 'रविकर' चल-चलिए |

10 comments:

  1. बेगम ने सुन ली फ़रियाद या नहीं ...

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  2. सहानुभूति के दो शब्द, बेहद भले लगे,
    ये ऐसा मसला है, जो जरा लम्बा चले----

    दर-असल
    कल
    जटा जूटधारी नारियल
    मिला था प्रसाद में --
    उसे तोड़ने का आदेश मिला था
    'लंच' करने के तुरंत बाद में---
    मै छीलने का औजार लेकर बैठ पाया ही था
    कि वो छीनी नारियल. झपट्टामार----
    की हुंकार ---
    सुनील बाबू तो पटककर तोड़ देते है
    आपको चाहिए छुरी काँटा जैसे औजार ---
    मैंने प्रतिक्रिया की--
    दूसरे की लौनिया हमेशा क्यों देती हो ?
    मत ताने मार--
    बस फिर क्या ??--
    बहस बढ़ गई
    और कविता गढ़ गई
    पर जानता हूँ---
    कद्दू गिरे चाक़ू पर या चाक़ू कद्दू पर
    कद्दू को ही कटना है----
    जो अब तक न पटी, तो क्या पटना है ??

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  3. दिनेश जी , पत्नियाँ इतनी भी बुरी नहीं होती जैसा चित्र आपने खींचा है । फिर भी एक उपाय बताती हूँ....अपने दिल की suनिए...वही कीजिये जो मन कहता है, कुछ दिनों में श्रीमती जी भी ताने मारना बंद कर देंगी।

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  4. अरे भाई!

    मैंने बुरा कहाँ कहा है ?

    वो तो मेरे प्यारे-प्यारे तीन बच्चों की माँ है.

    घर का सारा काम शुरू से ही वो करती रही हैं.

    उनकी अच्छाइयों के चर्चे पूरी सोसाइटी में हैं .

    सोसाइटी में मेरी पत्नी के चार बच्चे गिने जाते हैं मुझे मिलकर.

    बेटा TCIL, (PSU) नई दिल्ली (aajkal aabudhabi) में इंजीनियर है.

    बड़ी बेटी TCSL में, और छोटी झाँसी में B TECH कर रही है .

    शुरू से ही पत्नी डांटने-फटकारने का काम करती थी

    और मैं पढ़ाने एवं खेल कराने का,

    वो अपनी आदत की मुझपर प्रेक्टिस करती है

    और मै अपनी आदत, पड़ोस के बच्चों पर.

    सोचता हूँ की घर में एक कुत्ता पाल लूँ ----

    सारी डांट खाने से बच जाऊँगा,

    घर में कोई तीसरा तो होगा .

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  5. meet my SON At
    http://kushkikritiyan.blogspot.com/

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  6. .

    haha...not a bad idea of having a pet....lol

    Visited your Son's blog also.

    .

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  7. :):) मैं इसे केवल हास्य रूप में ही ले रही हूँ :)

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  8. बहुत सुन्दर हास्य्…………:):):)

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  9. यह हास्य ही हो सकता है...:))
    जिंदगी रविकर की हो, बा-सुकून. बा-चैन
    तभी खिलखिलाता कलम, औ मुस्काए नैन”
    सादर बधाई...

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