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31 May, 2011

उत्तर बताओ ब्लागर्स & justify

कौआ, कोयल, कोयला, काले दिल भी होत -----
उस काले का भजन कर, अक्षय जिसके स्रोत्र---
अक्षय जिसके स्रोत्र,  खोलता  नये   रास्ते  
भगत चढाते  भेंट,  ख़ुशी से  काम  वास्ते  
अब "रविकर" पछताय, पूछता "कहिये  रउवा "
उस काले का नाम,  लगे जस काला कौआ 

                         
 

10 comments:

  1. dinesh ji aapke prashn ka uttar mere vichar me ''SHANI DEV''hain .
    'SHANI DEV''ko khush karne ke liye kali vastu hi dan kee jati hain .aur unhe khush karne se manav jeevan me khushiyon ka sanchar hota hai.kal shani jyanti hai aur aaj aapne isi karan vash bhakt bloggars kee praiksha hetu shani dev aadharit prashn poochha hai.
    aapka blog mujhe behad pasand aaya hai aur ab yahan se jakar main use ''ye blog achchha laga par le rahi hoon.aapki upasthiti hamara utsahvardhan karegi.

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  2. महाराज राजीव कुमार कुल्श्रेस्थ जी एवं

    शनि महाराज की परम भक्तिनी शालिनी कौशिक जी को
    भक्त "रविकर" का शत-शत प्रणाम. धन्यवाद

    "जाकी रही भावना जैसी
    प्रभु मूरति देखि तिन तैसी"

    सच बोलूँ , मैंने--------
    भ्रष्टाचार का वास्तविक दोषी कौन?
    पढ़कर व्यंगमयी रचना की थी परन्तु
    "शनि महाराज" की परम कृपा से
    रचना भक्तिमयी हो गयी

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  3. कठिन प्रश्न था मेरे लिए। शालिनी जी का उत्तर मन मुग्ध कर गया।

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  4. कुछ समझ में ना आया ये तो

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  5. मेरी रचना थी तो काली-कमाई या काला धन पर,

    पर शनि महाराज की, इस रचना पर विशेष कृपा रही

    नए अर्थ के लिए--

    शालिनी जी का तहे-दिल से शुक्रिया

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  6. श्री शनि महाराज की जय हो

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  7. श्री शनि महाराज की जय हो

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  8. ravikar ji aur zeal ji aap dono ko maharat hasil hai kisi bhi vyakti ka dil rakhne kee.mujhe rajeev ji ne pahle hi bata diya tha ki mera uttar galat hai aur main ye jankar chupchap baith gayee thi ki kisi ko pata n chale ki main jan chuki hoon apni galti ko.kintu aaj ravikar ji ki agli post padhne jab aayee to man me socha ki shayad rajeev ji majak kar gaye hon aur mere sahi uttar ko galat bata gaye hon kintu rajeev ji to sadhu vyakti hain n ve jhooth bolte hain n sunna pasand karte hain aur ye bat aaj aur sabit ho gayee.main ravikar ji aur zeal ji aap dono ka hardik dhanyawad karti hoon.

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  9. ए भाई ! मैं सचमुच दिल से आपका आभारी हूँ |

    क्योंकि एक हंसी-मजाक की चीज को आपने अध्यात्म का रूप दिया |

    जब मैंने रचना दुबारा पढ़ी तो मुझे लगा की

    भगवान् शनि ने ही यह रचना मुझसे करवाई है |

    आपकी टिप्पणी और काले शेड से यह सिद्ध हो चुका है |



    कभी-कभी रचयिता को भी नहीं पता होता कि क्या हो रहा है |

    आप जैसे प्रबुद्ध अग्रेसर (not follower )

    मार्गदर्शन करके आभार भी लेने से मना कर देते हैं |

    आभार

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