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24 June, 2011

50 वीं पोस्ट का प्रारब्ध- : ढूंढता हूँ एक शब्द --

बीते कई अब्द *            *साल  
मिले न शब्द --
जद्दोजहद |
चाहूँ लिखना--
परन्तु 
नहीं जद्द-बद्द ||
ढूंढता हूँ एक शब्द --

मिलते ही 
स्नेह से पुचकारुंगा |
उसकी आत्मा को पुकारूँगा |
यदि आई तो ठीक 
नहीं तो उसे
पटकूंगा-झटकुंगा |

तोडूंगा-मरोडूंगा  
काट के -फाड़ के  |  
जैसे भी शब्द से 
कुछ भाव निकाल के |   
परोस दूंगा ||

अब बारी पाठक की 
झेलता रहे--
अगर भाव सकारात्मक तो 
नीति या सन्देश |
और अगर नकारात्मक तो
हास्य-व्यंग ||

नजरिया नहीं है तंग --
है यदि भाव-विहीन 
तो क्या?
पाठक झेले 
कुछ देर "शब्द"  से खेले ||

16 comments:

  1. अब बारी पाठक की
    झेलता रहे--
    अगर भाव सकारात्मक तो
    नीति या सन्देश |
    और अगर नकारात्मक तो
    हास्य-व्यंग |
    नजरिया नहीं है तंग --
    है यदि भाव-विहीन
    तो क्या?
    पाठक झेले
    कुछ देर "शब्द" से खेले ||
    पाठक का क्या है
    थोडा पढ़ेगा
    थोडा देखेगा
    जो सोचा है आपने
    वो नहीं होगा
    अपनी उँगलियों से
    चंद शब्द लिखेगा और
    आगे बढ़ जायेगा.
    झेलने को न वो बना है
    न झेलेगा.

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  2. बड़े शांत मन लग रहे हैं आप |
    एकदम नहीं पड़ी आप पर --
    इस शब्द की छाप ||

    आभार |
    ४९ वी जरुर पड़ें |

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  3. अब बारी पाठक की
    झेलता रहे--
    अगर भाव सकारात्मक तो
    नीति या सन्देश |
    और अगर नकारात्मक तो
    हास्य-व्यंग |
    नजरिया नहीं है तंग --
    है यदि भाव-विहीन
    तो क्या?
    पाठक झेले
    कुछ देर "शब्द" से खेले ||bahut hi badhiyaa

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  4. आभार |
    ४९ वी जरुर पड़ें |

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  5. बहुत अच्छा...जब आप पाठक को इतना कहेंगे तो उसे झेलना तो पड़ेगा ही..

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  6. बहुत बहुत आभार |
    मिलते रहें हम |

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  7. बहुत बहुत आभार ||
    दुनाली पर अच्छी काल्पनिक प्रस्तुति ||

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  8. है यदि भाव-विहीन
    तो क्या?
    पाठक झेले
    कुछ देर "शब्द" से खेले |

    Wakaee, kawi ki itani jaddojahad ke bad pathak ko itana to karna hee chahiye.

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  9. है यदि भाव-विहीन
    तो क्या?
    पाठक झेले
    कुछ देर "शब्द" से खेले

    पाठक को तो उसे झेलना पड़ेगा ही.

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  10. बहुत-बहुत आभार |
    आपका काव्य, प्रेरित एवं
    उत्साहित करता है लगातार ||

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  11. कल 21/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  12. आप तो रोज ही कुछ न कुछ परोसते रहते हैं.
    बधाई एक और प्रस्तुति के लिए

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  13. बहुत है उम्दा लेखन.....बेहतरीन

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  14. “रच ना पाना टीस है, रचना पाना जीत
    रचना मन अम्बर मिले, रच ना मेरे मीत”

    बढ़िया अभिव्यक्ति... सादर बधाई...

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  15. वाह ...बहुत ही बढि़या ।

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