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29 June, 2011

सुन्दर टिप्पणी (उच्चारण पर)

टिप्पणियों  का  नहीं  मोहताज  लेखक,
ब्लॉग ने लेकिन बनाया क्या करें ?

दाद पाने की फितरतें मंच की --
वो  नहीं ही, भूल पाया क्या करें ||

इरसाद औ इकरार ने रोशन किया 
हर मर्तवा इसको सजाया क्या करें |

 है फलां के  सौ हमारे पाँच ही --
राम को कौरव बनाया  क्या करें |

वो इधर आयें न आयें मेहरबां-- 
टिप्पणी बेढब लगाया क्या करें ||

आँख को हर चीज सुन्दर लग रही--
आभार बस हमने जताया क्या करें ||  

7 comments:

  1. सार्थक टिप्पणी लेखक को प्रोत्साहन देती हैं, लेकिन टिप्पणी ही सब कुछ नहीं. अगर आप को लेखन से आत्मसंतुष्टी मिलती है तो लेखन के लिये यही काफी है..

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  2. दाद पाने की फितरतें मंच की --
    वो नहीं ही, भूल पाया क्या करें ||
    sach likha hai .aabhar

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  3. आप का बलाँग मूझे पढ कर आच्चछा लगा , मैं बी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

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  4. कैलाश जी से सहमत हूँ ....लेखन से आत्मसंतुष्टि मिलनी चाहिये !

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  5. आपकी यह रचना ---
    ट्रक- ट्रैक्टर से ही बचे, झूल रही सरकार |

    from "कुछ कहना है" by रविकर

    मैंने यहाँ आज आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


    बटुए में , सपनों की रानी ...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .
    ____________________________________
    लगायी थी ...पर आपने लगता है डिलीट कर दी

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