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02 July, 2011

लगकर गले जाइए

जाइये अब चले जाइए, 
एक बार फिर खले जाइए |
शाकाहारी  हैं  तो  क्या ?
कलेजा है,  तले जाइए |
                 महफ़िल छोड़कर चले,
                 जल रहे दिलजले जाइए |
                 जो छला किये छलिये,
                 तो आप भी छले जाइए ||
तोते  अब  उड़े  न  उड़े, 
हाथों को मले जाइए |
है बदनाम खूब  मैना, 
रूप में  ढले  जाइए  ||
                  उन्मुक्तता फितरत में,
                  तो पड़ाव अगले जाइए |
                  जाने कब मुलाक़ात हो, 
                  सो लगकर गले जाइए ||

7 comments:

  1. महफ़िल छोड़कर चले,
    जल रहे दिलजले जाइए |

    ek behad majedar rachna ! badhai !

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  2. तोते अब उड़े न उड़े,
    हाथों को मले जाइए |
    है बदनाम खूब मैना,
    रूप में ढले जाइए ||
    bahut koob likha hai .aabhar

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  3. जाने कब मुलाक़ात हो,
    सो लगकर गले जाइए ||
    बहुत खूब...

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  4. महफ़िल छोड़कर चले,
    जल रहे दिलजले जाइए |
    जो छला किये छलिये,
    तो आप भी छले जाइए ||
    sahi kaha thagne se thaga jana jyada achchha hai.

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  5. शाकाहारी हैं तो क्या ?
    कलेजा है, तले जाइए |

    यह मजेदार है। ऐसा लगता है सब टिप्पणीकारों ने मिलकर सारी कविता जो गजल जैसी है, को ही उद्धत कर दिया।

    एक बार फिर खले जाइए में खले का मतलब?

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  6. शाकाहारी हूँ, कुछ नहीं खाऊंगा, सिर्फ़ प्यार अपनापन चाहिए

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  7. बहुत खूब रविकर जी .आभार

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