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08 July, 2011

बातें सोन-चिड़ी की ||

बाँछे  खिलती  जा  रही  है  गजनवी  की |
आँखे  खुलती  जा  रही हैं  हम  सभी की ||

अंग्रेजों ने  कल  वहाँ  अफ़सोस  मनाया,
उनकी बड़ी यही गलती है, तीन सदी की ||

कोहिनूर सरीखे कई काम अंजाम दिए पर
व्यर्थ हुआ जो छोटी-मोटी बड़ी ठगी की ||

उधर गजनवी  नरकवास में मुहं को ढापे-
सोचे  मन में, सोमनाथ  से व्यर्थ घटी की ||

नादिरशाह सरीखे कितने मन के लंगड़े -
उत्तर-भारत की जनता पर चोट बड़ी की |

दक्खिन के  मठ-मंदिर का संकल्प तेज था
पाई-पाई  संरक्षित  कर  बात  बड़ी  की ||

रविकर को विश्वास हुआ कि भारत माता
सारे जग से अच्छी , बातें सोन-चिड़ी की  ||

17 comments:

  1. रविकर को विश्वास हुआ कि भारत माता

    सारे जग से अच्छी , बातें सोन-चिड़ी की |
    क्या बात है रविकर जी,बिलकुल सही विश्वास हुआ.

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  2. बहुत हे सुन्दर आप की कल्पनाये |

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  3. जी हाँ
    सारे जग से अच्छी , बातें सोन-चिड़ी की |

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  4. अब लग रहा है कि इन हिन्दुओं का धन, किसी भी युग में कोई भी ले लो, ये कभी उफ़ तक ना करेंगे।

    लूट लो इनका माल लूटाने कि लिये ही तो रखा हुआ है, अगर काम का होता तो कहीं लगा नहीं देते?

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  5. आप के पास कथानकों का भण्डार है|

    बेहतर है मुक़ाबला करना

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  6. प्रिय रविकर जी बहुत अच्छी प्रस्तुति इतिहास दिखाती सच में कौन जानता था की छुपी धरोहर यहाँ पड़ी है गोरी गजनी नादिरशाह अंग्रेज ठगे होंगे -सपने काफूर कब्र में भी उनके -
    शुक्ल भ्रमर ५

    उधर गजनवी नरकवास में मुहं को ढापे-

    सोचे मन में, सोमनाथ से व्यर्थ घटी की ||

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  7. aaderniy ravikar ji
    aitihasik pristh bhumi ko saral aur suruchi purna tarike se aapne prastut kiya..euin hi prayas karte rahein... aur hamein itihas ki baatein batate rahein..pranam

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  8. सही कह रहे हैं ... अँगरेज़ भी आज यहाँ के खजाने को देख पछता रहे होंगे ..अच्छी प्रस्तुति

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  9. रविकर को विश्वास हुआ कि भारत माता

    सारे जग से अच्छी , बातें सोन-चिड़ी की ||

    अद्भुत। सारे ऐतिहसिक पात्रों को प्रतीक के रूप में प्रयोग कर डाला। यह आप ही कर सकते हैं।

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  10. अंग्रेजों ने कल वहाँ अफ़सोस मनाया,

    उनकी बड़ी यही गलती है, तीन सदी की ||behtareen

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  11. सारे जग से अच्छी बातें सोंन चिड़ी की .
    सब विषयों पर हँसते गाते रविकर जी की .

    s

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  12. बातें सोन-चिड़ी की ..बहुत सुन्दर रचना,शुभकामनायें

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  13. रविकर को विश्वास हुआ कि भारत माता

    सारे जग से अच्छी , बातें सोन-चिड़ी की ||..बहुत ही सुन्दर रचना
    शुभकामनाएं ...

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  14. सुन्दर प्रस्तुति..सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा..

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