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15 July, 2011

हर-हर  बम-बम,  बम-बम धम-धम |
तड-पत  हम-हम,  हर पल नम-नम ||

अक्सर  गम-गम, थम-थम, अब थम |
शठ-शम शठ-शम, व्यर्थम  -  व्यर्थम ||

दम-ख़म, बम-बम, चट-पट  हट  तम |
तन  तन  हर-दम
*समदन सम-सम ||    *युद्ध

*करवर   पर  हम,  समरथ   सक्षम |       *विपत्ति
अनरथ  कर कम, झट-पट  भर दम ||    

भकभक जल यम, मरदन  मरहम | 
हर-हर  बम-बम, हर-हर  बम-बम || 


राहुल  उवाच :  कई देशों में तो, बम विस्फोट दिनचर्या में शामिल है | 
                        राह-गुल गई तेरी, राह-उल  ||
चिदंबरम उवाच: इक्तीस माह तो बचाया मुंबई को |
                    
  देश को कब तक बचाओगे ????

12 comments:

  1. keya etne aavaj

    kub kaha
    aap ne

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  2. कविता आग है तो संवाद ( महान राजनेताओं के) आहुति...

    बस धधक रहा है अंतस...

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  3. हर-हर बम-बम, हर-हर बम-बम
    ..बढ़िया अंदाज..बढ़िया प्रस्तुति

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  4. दम-ख़म, बम-बम, चट-पट हट तम |
    तन तन हर-दम *समदन सम-सम ||

    बात कहने का ये एक अंदाज हो सकता है। आपकी रचना पढने के बाद लगा। बहुत सुंदर
    बधाई

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  5. बहुत खूब शानदार प्रस्तुति बधाई

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  6. सुन्दरतम अतिसुन्दरतम.बधाई

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  7. प्रिय रविकर जी सावन के महीने में न जाने क्या क्या स्वर- ये सरकार का ककहरा देखना होगा -सुन्दर रचना
    हर-हर बम-बम, बम-बम धम-धम |
    तड-पत हम-हम, हर पल नम-नम ||
    शुक्ल भ्रमर ५
    बाल झरोखा सत्यम की दुनिया

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  8. वाह! क्या बात है, कविता की शब्द योजना ऐसी मानों हर शब्द नगाड़े पर बज रहे हों धम-धम, धम-धम!!

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  9. बम बम भोला बम बम भोला

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  10. भाई रविकर जी बहुत सुन्दर ब्लॉग रचना बधाई और शुभकामनायें |आपके तारीफ अंदाज मुझे पसंद आया |

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  11. aapki kavita ke hai bada dam-kham......abhar

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