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05 August, 2011

लघु-$ता : दुर्मुख-विजयी सोच |

एक गाँव है पटरंगा | 
पूरब - पश्चिम में बड़ी अदावत है |
 

कई वर्षों से पश्चिमवालों का ही दबदबा है | 
मुखिया भी पश्चिम का |
 

मुखिया मुख सो --- 
ही है पर  पुश्तों की  काली कमाई  जमा क़र रखी है  स्विसराल में |
इधर अन्ना बाबा के साथ मिलकर पूरब वालों ने हल्ला बोल रखा है ||
 

ये मुखिया अभी हाल में, हफ़्तों स्विसराल में बिता क़र आया  है  |
भला अब कैसे निकले, दुबारा ? और अपनी काली कमाई ठिकाने लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाये ?? 
 

इसी उधेड़बुन में था मुखिया कि एक दिन दुर्मुख-विजय मिला,
और अगले हफ्ते मुखिया हो गए,
बड़े शहर के बड़े हस्पताल में एडमिट ||

सब साले सेवा में ---

शल्य क्रिया सफल हो || 
शुभकामनाएं--

13 comments:

  1. सारा सच कह दिया।

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  2. सार्थक और प्रासंगिक ...

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  3. बस दिग्विजय जैसा सोच गया ||

    आभार ||

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  4. नरेश जी का पटरंगा से SMS

    लघु-$ता ?

    क्या है ये ?

    ये लघु कथा है --

    पर यहाँ तो $ (डालर) का निशाँ है भाई |

    क्या ये भी है काली कमाई ||

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  5. जय अन्ना बाबा की ,मंद बुद्धो राज कुमार की ,मम्मी जी की ,भारतीय प्रजा तंत्र की .तिहाड़ जेल की .

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  6. सार्थक और सटीक प्रस्तुति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  7. प्रिय रविकर जी गजब का तीर छूटा अब देखो साले लोग पार कर देते हैं या नहीं ..स्विसराल..बहुत खतरनाक बन गया है कहीं नाक न कटा दे ---
    भ्रमर ५

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  8. स्विसराल..................
    हंसा दिया रविकर जी। बात कहने का तरीक़ा मज़ेदार है।

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  9. लघु-$ता में

    क के स्थानपर

    $ का निशाँ क्या कर रहा है ??

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  10. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
    चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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