Follow by Email

23 September, 2011

मंगल-मंगल काज--

Be A Martian
नाशा की आशा जगी, अमरीकन अभियान | 
 मंगल-ग्रह पर ढूंढ़ता, जीवन जीव निशान |

जीवन जीव निशान, हवा पानी विज्ञानी |
जीवन मंगलमयी, चाहता हिन्दुस्तानी |

भौतिक सुख की चाह,  यह अमरीका प्यासा |
नाशा जीवन-राह,   खोजता जीवन नाशा ||





अमरीका मंगल छुआ, पर अमरीकन व्यग्र |
मन्दी  ऐसी  मार है,  रहेगा  कब  तक अग्र ||

रहेगा कब तक अग्र, हुआ अवसादित जीवन |
चार्वाक  की  नीत, क्षीण परिवारिक बंधन |

मितव्ययी हम आज, माथ पर मंगल-टीका |
मंगल-मंगल काज,  कहाँ पावै अमरीका ??

16 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  2. दोनों कुण्डलियाँ बेहतरीन

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी रचना।

    ReplyDelete
  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    ReplyDelete
  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    ReplyDelete
  6. जबरदस्त कुंडलियां रविकर जी ।

    ReplyDelete
  7. विज्ञान और संस्कृति ...सुंदर रचना

    ReplyDelete
  8. अच्छी रचना , बधाई

    ReplyDelete
  9. बढ़िया कुण्डलियाँ....
    सादर बधाई...

    ReplyDelete
  10. सुंदर कुंडलियाँ

    ReplyDelete
  11. सुन्दर रसमय भाव भरे मंगलमय दोहे '
    जुड़े सृजन से जो भी सच वह कवी मन मोहे

    सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई

    ReplyDelete
  12. रहेगा कब तक अग्र, हुआ अवसादित जीवन |
    चार्वाक की नीत, क्षीण परिवारिक बंधन |

    बहुत सुन्दर और सटीक छंद...

    ReplyDelete