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08 January, 2012

नव-वर्ष

कर्तव्य - पथ 
बिसराता मनुष्य 

अधिकार पर 
हर्षाता युग
निकृष्ट जीवन 
आत्मा अशुद्ध

भूलते यथार्थ 
अनर्गलता पुष्ट 
 चेतो रे चश्मों 
बहाओ प्रेम-नीर

देखने को हर्षित 
नव-वर्ष है अधीर  

14 comments:

  1. देखने को हर्षित
    नव-वर्ष है अधीर

    अहा! बहुत सुन्दर भाव हैं.

    आपके दर्शनों के लिए मेरा ब्लॉग अधीर है जी.

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  2. बहुत सुन्दर भाव ......

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  3. हां,न चेते तो कोई फर्क़ नहीं पड़ेगा कि नव वर्ष कब आया,कब गया।

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  4. बहुत सुंदर रचना...सपरिवार नव वर्ष की शुभकामनाएँ!

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  5. निकृष्ट जीवन

    आत्मा अशुद्ध


    भूलते यथार्थ

    अनर्गलता पुष्ट ........................बेहतरीन ...उम्दा...

    नववर्ष मंगलमय हो

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  6. सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति ...

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  7. बहुत सटीक लिखा है आपने!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  8. सुन्दर अंदाज... बढ़िया रचना...
    सादर.

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  9. नववर्ष मंगलमय हो

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  10. चेतो रे चश्मों
    बहाओ प्रेम-नीर

    देखने को हर्षित
    नव-वर्ष है अधीर

    बहुत खूब ... उत्तम अभिव्यक्ति ...
    आपको नए साल की शुभकामनायें ..

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