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23 February, 2012

पल-पल पीपल प्राण, वायु ना देता थमने --

रविकर की टिप्पणी

अपने अंतरजाल पर, इक पीपल का पेड़ ।
तोता-मैना बाज से, पक्षी जाते छेड़ ।
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पक्षी जाते छेड़, बाज न फुदकी आती ।
उल्लू कौआ हंस, पपीहा कोयल गाती ।

 पल-पल पीपल प्राण, वायु ना देता थमने ।
पाले बकरी गाय, गधे भी नीचे अपने ।

4 comments:

  1. पक्षी जाते छेड़, बाज न फुदकी आती ।
    उल्लू कौआ हंस, पपीहा कोयल गाती ।
    बहुत खूब .काव्य सौन्दर्य बिखेरती रचना .

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  2. हाँ ब्लॉग जगत ऐसा ही है

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