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10 March, 2012

पैरवीकार थोडा सा खुद भी झेलो - अमेरिका मत बनते जाओ ।

"होली तिलक लगा कर खेलो "
जीवन की आपाधापी में फुर्सत के दो पल न पाए ।
होली के शुभ अवसर पर अभिजात्य-वर्ग यह सीख सिखाये ।
तो बताओ --
बंद कर रहे अपने स्वीमिंग पूलों को क्या ?
कम कर रहे अपने उद्यानों के फूलों को क्या ??

चलो नहा लो दो-दो बारी--
पर शावर की छोडो यारी ।
बाथ टबों को जरा भुलाओ ।
ए सी के बदले में साहब --
कभी कभी तो फैन चलाओ ।।

3 comments:

  1. कोशिश तो करते हैं.....
    वाशिंग मशीन का पानी पौधों को देते हैं :-)

    सादर.

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  2. अमेरिका मत बनते जाओ ।
    "होली तिलक लगा कर खेलो "
    अच्छी प्रस्तुति .

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  3. सही कहा है आपने..हम अपनी संस्कृति तो भूलते जा रहे हैं..

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