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12 April, 2012

धरो हाथ पर हाथ, मिटे रिश्ते की शुष्की-

दर्द जर्द बिखरा पड़ा, धरती अम्बर रक्त ।
उभय पक्ष पीड़ा सहें, यद्दपि वे आसक्त ।




यद्दपि वे आसक्त,  जमे जिद जख्म-जखीरा ।
राधा सहे विछोह, पुकारे मन की मीरा ।



आओ आपा खोय, होय मुखड़े पर मुस्की ।
धरो हाथ पर हाथ, मिटे रिश्ते की शुष्की ।  


handshake - photo/picture definition - handshake word and phrase image



14 comments:

  1. राधा सहे विछोह, पुकारे मन की मीरा ।
    बहुत अच्छा लगा यह प्रयोग!

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  2. शुष्की और खुश्की धीरे-धीरे मिट रही है....बढ़िया आवाहन !

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  3. सर्वप्रथम बैशाखी की शुभकामनाएँ और जलियाँवाला बाग के शहीदों को नमन!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
    सूचनार्थ!

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  4. वाह..............

    वैशाखी की शुभकामनाएँ.

    सादर.

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  5. राधा सहे विछोह, पुकारे मन की मीरा ।
    बहुत अ

    च्छा लगा यह शब्द प्रयोग!

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  6. क्षमा-याचना सहित एक हास्य -

    देखा हमने सुबह-सुबह ,रविकर जी का ड्रीम
    बिना बताये खा गये , पूरी आइस् क्रीम
    पूरी आइस् क्रीम , देख भाभी चिल्लाई
    सूझा नहीं उपाय , कुण्डलिया रच डाली
    शुष्की होवे दूर , पुकारे मन की "रेखा"
    धरती अम्बर रक्त , ख्वाब में हमने देखा.

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    1. भैया आइस-क्रीम की, सही पकड़ ली बात |
      भोजन -भट्टों को नहीं, एकै बात सुहात |
      एकै बात सुहात , होय ना टोका-टाकी |
      खात कठौता भात ,भूख बाकी की बाकी |
      महँगी आइसक्रीम, पुत्र हित रक्खी मैया |
      रविकर दो -दो जीम , डांट भी खाया भैया ||


      तेरह महिने बाद पुत्र, आया माँ दरबार |
      पति-प्रति दृष्टी बदलती, रंच-मात्र न प्यार |
      रंच-मात्र न प्यार, बने पकवान अनोखे |
      बीता पूरा साल, निगम जी उनको देखे |
      फ्रिज में रक्खी माल, होय ना बाएं-दहिने |
      रविकर घोटे - राल, हाय रे तेरह महिने ||

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    2. लाया मेरे लिए पुत्र, हाथ घडी का गिफ्ट |
      उसी घडी से है हुआ, ध्यान मिसेज का शिफ्ट |

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  7. रविकर निगम संवाद कवित्तमय रहा .कविता दोनों के घर पानी भरती है .

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  8. बहुत खूब सुन्दर प्रस्तुति

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