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20 April, 2012

अनर्गल टिप्पणी की इस विधा का क्या कुछ नाम भी है ?



(१)
हवा हवाई हो रहा माल्या जी का बेडा ।
अरबों का घाटा लगे लगे मामला टेढ़ा ।
सरकार करे सुनवाई ।
  पेट्रोल दाम घटाई ।।
अपनी दारु सस्ती कर, पर मंत्री मसला छेड़ा ।।

(२)
थी केरी के इक झुण्ड, बहुतेरी साथ इकट्ठी ।
पर हुआ निशाना झंड, थी धोखे की टट्टी ।
थी जली काम की भट्ठी ।
खुब चले चटकना चट्टी।
 हस्पताल में हुई हवश की बढ़िया मरहम पट्टी ।  

(३)
घोड़ा जोखिम पैसा , डाकू बनने गया  जवान ।
पर गब्बर उस्ताद ने दिया आइडिया  एक महान ।
दूल्हा बन जा प्यारे ।
तो ख़्वाब पूरते सारे ।
सजा संवारा घोड़ा, दाहिज मोटा, जोखिम जान ।


3 comments:

  1. ...कहने के हो ढंग हज़ार
    पर सार्थक हो तो नहीं बेकार !

    आप यूँ ही टिपियाते और कवियाते रहें !

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  2. nice poem

    सरकार करे सुनवाई पेट्रोल दाम घटाई
    this is the wish of every Indian.

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  3. (१)
    हवा हवाई हो रहा माल्या जी का बेडा ।
    अरबों का घाटा लगे लगे मामला टेढ़ा ।
    अरबों का घोड़ा ,चले थोड़ा थोड़ा

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