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11 April, 2012

कथा महाभारत सुनों, अवनति के दृष्टान्त

बाल्मीकि जी की लिखी, रामायण को बाँच ।
न्नति का इतिहास यह, करो ग्रहण सब साँच ।।
कथा महाभारत सुनों, अवनति के दृष्टान्त ।
दुर्गुण त्यागे अक्लमंद, गीता से मन शांत ।। 

काम वासना में फंसे, शांतनु का अन्याय ।
वंचित होती योग्यता, भीष्म हुवे असहाय ।।

सिंहासन से बन्ध रहे,  भोगा सारा देश ।
नारी के अपहरण से, अम्बा भोगी क्लेस ।।
File:Krishna and Arjun on the chariot, Mahabharata, 18th-19th century, India.jpg
पराकाष्ठा पतन की, बने नियोगी व्यास ।
धृतराष्ट सह पान्डु को, मिली भूमिका ख़ास ।

पढ़ते वेद-पुराण पर, करें नहीं व्यवहार ।
सत्य-धर्म सम्बन्ध की,  होती क्षति अपार ।।

दरकिनार कर योग्यता, आगे करते स्वार्थ ।
महा-युद्ध की घोषणा,  आगे कृष्णा-पार्थ ।।

File:Snakesacrifice.jpg 

गुण के ग्राहक बन करो, रामायण का  ध्यान ।
सिखा महाभारत रही,  होता क्यूँ अवसान ।।

7 comments:

  1. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति....

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  2. पढ़ते वेद-पुराण पर, करें नहीं व्यवहार ।
    सत्य-धर्म सम्बन्ध की, होती क्षति अपार ।।

    bahut badhiya............
    सादर.

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  3. इन दिनों मचे घमासान में ये बातें काम की हैं।

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  4. ज्ञान की बातें...बहुत बढ़िया|

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  5. अथ महाभारत कथा .....श्रम साध्य काम !

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  6. नीति और ज्ञान की गूढ़ बातें।

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