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07 April, 2012

कितने आये गए, नहीं रविकर को जाना -

दंगे से डरता नहीं, दरिया दिल इन्सान ।
करे हिफाजत सभी की, लेता जब वो ठान ।

लेता जब वो ठान, असंभव उसे भगाना ।
कितने आये गए, नहीं रविकर को जाना ।

मानव का क्या जोर, लबारी मत ले पंगे ।
बहुत मचाया शोर, बन्द कर पागल दंगे ।।

8 comments:

  1. अच्छी प्रस्तुति!
    सादर

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  2. बहुत मचाया शोर, बन्द कर पागल दंगे ....jis din dangai ko ye bat samajh me aa jayegi us din se dharti swarg ban jayegi....

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  3. आप तो बने रहें..बाकी सब आनी जानी है...

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  4. जी
    चर्चा मंच के सन्दर्भ में हैं
    आभार
    और रविकर तो रहेगा ही |
    दिनेश भले ही चला जाए ||

    सादर |

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